ग्रहों से शुभ फल प्राप्ति: ये औषधियाँ देंगी अनुकूलता, जानें कैसे करें स्नान।

May 2, 2024

ग्रहों से शुभ फल प्राप्त करने के लिए विभिन्न औषधियों का स्नान करना एक प्राचीन परंपरा है। यह प्रक्रिया धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की दशा और उनकी प्रभावक्षमता को संतुष्ट करने के लिए की जाती है। ग्रहों की शांति के लिए दान की तरह औषधि स्नान भी एक अचूक उपाय है। आईए जानते हैं कि किस ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए पानी में कौन सी चीज मिलाकर स्नान करना चाहिए। हिंदू धर्म में पूजा पाठ मंत्र जब स्नान दान आदि का महत्व है। स्नान करने से हमारा शरीर स्वच्छ बना रहता है तथा शास्त्रों के अनुसार स्नान से ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी काम किया जाता है।  ग्रह दोष और दुर्भाग्य को दूर करने और सौभाग्य को पाने के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं।

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आईए जानते हैं कि ग्रह दोष को दूर करने के लिए कौन सी औषधीयों को पानी में डालकर स्नान करना चाहिए।

सूर्य (सुर्य): 

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को शक्ति और अधिकार का प्रतीक माना जाता है। सूर्य को ब्रह्मांड का स्वामी, ऊर्जा का केंद्र और ग्रहों का सम्राट भी माना जाता है। कुंडली में सूर्य ग्रह को शांत करने के लिए लाल रंग के फूल, इलायची, केसर एवं गुलहटी मिलाकर स्नान करने से कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभाव को काम किया जा सकता है। 

चंद्र (सोम):

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छाओं और आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह व्यक्ति की भावनाओं और मन की स्थिति का नियंत्रण भी करता है,। चंद्र ग्रह से संबंधित दोष को दूर करने के लिए सफेद चंदन, सफेद सुगंधित फूल, गुलाब जल या शंख में जल भरकर स्नान करें।

मंगल (अंगारक): 

मंगल की प्रबल स्थिति से एक सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण होता है। मंगल ग्रह जीवन में ऊर्जा और बल का नियंत्रण करता है। मंगल का सीधा संबंध रक्त और साहस से होता है, इसलिए इसकी शुभता पाने के लिए लाल चंदन, बेल की छाल, गुड मिश्रित पानी से नहाने से राशि पर मंगल का प्रभाव का होता है।

बुध (बुध): 

बुध ग्रह को मस्तिष्क, क्षमता,  दृढ़ता और कौशल का कारक ग्रह माना जाता है। बुध ग्रह को संदेशवाहक भी कहा जाता है। आप यदि चाहते हैं कि आप पर बुद्ध की कृपा दृष्टि बनी रहे, तो आप इसके लिए स्नान के जल में जायफल, शहद, चावल डाल कर स्नानकरें। इससे बुद्ध के दुष्प्रभाव कम होते है।

गुरु (बृहस्पति): 

गुरु ग्रह व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और भाग्य का शासन लाता है। ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह आध्यात्मिकता और शिक्षा से संबंधित है। यह जातक के जीवन में धन, बुद्धि और उदारता को नियंत्रित करता है। राशि में देवगुरु बृहस्पति की शुभता पाने के लिए और गुरु ग्रह से जुड़े दोष दूर करने के लिए पीली सरसों, गूलर और चमेली के फूल मिश्रित जल से स्नान करें। 

शुक्र (शुक्र): 

वैवाहिक जीवन अथवा प्रेम प्रसंग में मिठास के लिए शुक्र ग्रह जिम्मेदार होता है। यदि कुंडली में शुक्र की स्थिति अशुभ हो, तो शादीशुदा जीवन में अर्चन आती है। शुक्र के राशि में दुर्बल होने से दांपत्य जीवन में परेशानियां आती है। ऐसे में इसके प्रभाव को कम करने के लिए गुलाब जल, इलायची और सफेद फूल डालकर स्नान करना चाहिए।

शनि (शनि): 

ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को प्रसन्न करना काफी कठिन माना जाता है। शनि ग्रह अथवा कर्म देवता अनुशासन और कठिन परिश्रम के लिए जाने जाते हैं। शनि को न्याय का देवता कहा गया है। शनि कर्म के हिसाब से फल देते हैं। शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए पानी में काली तिल, सौंफ, सुरमा या लोबान डालकर स्नान करना चाहिए।

राहू: 

ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को भ्रम कारक और छाया ग्रह कहा जाता है। मान्यता है कि राहु को कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता। राहु का संबंध गोपनीय और रहस्यमई बीमारियों से होता है। राहु से संबंधित दोष को दूर करने के लिए पानी में कस्तूरी,  लोबान मिलाकर स्नान करना चाहिए।

केतु: 

केतु व्यक्ति को आध्यात्मिक प्रवृत्ति और सांसारिक महत्वाकांक्षाओं के प्रति शक्ति प्रदान करता है। साथ ही मुक्ति की ओर अग्रसर करता है। केतु ग्रह व्यक्ति को ज्ञान की ओर ले जाता है। व्यक्ति के चरित्र मानसिकता को बेहतर बनाने में केतु का योगदान होता है। केतु के कष्टों से मुक्ति पाने और अशुभ प्रभाव कम करने के लिए लोबान वा लाल चंदन को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. कौन सी औषधीयां है, जिनसे स्नान करने से ग्रहों का शुभ फल प्राप्त होता है?

A. कुछ प्रमुख औषधियाँ हैं जिनका स्नान करने से ग्रहों से शुभ फल मिलता है: गुड़, नींबू, जैतून का तेल, गुड़मार, बादाम, तुलसी, शंखपुष्पि आदि औषधियों से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

Q. स्नान का सही समय क्या है और कितनी बार करना चाहिए?

A. स्नान का सही समय सुबह के समय माना जाता है, विशेष रूप से सूर्योदय के बाद। इसके अलावा, भारतीय पौराणिक ग्रंथों में भी दिन के विभिन्न समयों में स्नान का महत्व बताया गया है। सामान्यतः, दिन के तीन अवस्थाओं – प्रातः (सुबह), मध्याह्न (दोपहर), और संध्या (शाम) में स्नान की सिफारिश की जाती है।

Q. नीम का पानी बनाने का तरीका क्या है और कितना उपयोग करना चाहिए?

A. नीम का पानी बनाने के लिए, नीम के पत्ते को पानी में उबालें और इसे ठंडा होने तक रखें। फिर इसे छानकर प्राप्त किया गया नीम का पानी स्नान के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसे प्रतिदिन स्नान के समय उपयोग किया जा सकता है।

Q. ग्रहों के अनुकूल स्नान का क्या महत्व है?

A. ग्रहों के अनुकूल स्नान का महत्व उनके आध्यात्मिक और शारीरिक प्रभावों को बनाए रखने में है। इसके माध्यम से, व्यक्ति अपने आसपास के ग्रहों के प्रभाव को समझने और संतुलित रहने का प्रयास कर सकता है। यह आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में भी देखा जाता है, जो व्यक्ति को आत्मा की ऊर्जा को स्थिर करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, स्नान के द्वारा शारीरिक शुद्धि भी होती है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।

Q. औषधियों के स्नान से कौन-कौन से ग्रहों के प्रभाव दूर हो सकते हैं?

A. औषधियों के स्नान से निम्नलिखित ग्रहों के प्रभाव दूर हो सकते हैं:

  • शनि।
  • राहु।
  • केतु।
  • बुध।
  • चंद्रमा।
  • सूर्य।
  • बृहस्पति।
  • शुक्र।

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